टूटा स्कूल—टूटी उम्मीद टूटी शौचालय कलमी गाँव में शिक्षा तंत्र का बुरा हाल का उजागर!
खरसिया ब्लॉक के ग्राम पंचायत भैना पारा के आश्रित गाँव कलमी का प्राथमिक विद्यालय आज जिंदा खंडहर बन चुका है। 1993 में बना यह स्कूल देखते ही देखते पूरी तरह जर्जर हो गया है, लेकिन मजबूरी में मासूम बच्चे इसी टूटती–ढहती इमारत के अंदर पढ़ाई करने को मजबूर हैं।
चार दिन पहले स्कूल की खिड़की का छज्जा अचानक भरभराकर नीचे गिर गया। किस्मत अच्छी थी कि उस समय बच्चे कक्षा के अंदर नहीं थे, वरना यह हादसा एक बड़े त्रासदी में बदल सकता था। गाँव वाले इसे ईश्वर की कृपा मान रहे हैं।
स्कूल का हाल इतना भयावह है कि सिर्फ कमरों की दीवारें और छत ही नहीं, बल्कि शौचालय भी पूरी तरह नष्ट हो चुका है। छोटे-छोटे बच्चे खुले में जाने को मजबूर हैं, जो सुरक्षा और स्वास्थ्य दोनों के लिए गंभीर खतरा बना हुआ है।
इस हालत की जानकारी स्कूल की शिक्षक द्वारा कई बार मौखिक रूप से प्रशासन को दी गई, और अधिकारी निरीक्षण के लिए भी आए, लेकिन आज तक यह स्पष्ट नहीं किया गया कि नया भवन कब बनेगा।
ग्राम पंचायत भैना पारा के सरपंच अनहित राम को भी समस्या से अवगत करा चुके हैं, लेकिन अब तक शासन–प्रशासन की ओर से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। इससे लोगों में भारी नाराजगी है।
गाँव के अभिभावकों का कहना है कि यह सिर्फ एक स्कूल की समस्या नहीं है, बल्कि बच्चों के जीवन और भविष्य की सुरक्षा का सवाल है। टूटी इमारत के नीचे पढ़ाई करना किसी भी वक्त जानलेवा साबित हो सकता है।
फिलहाल पूरा गाँव प्रशासन से सिर्फ एक ही सवाल पूछ रहा है—
“बच्चों की जान खतरे में डालकर आखिर कब तक पढ़ाई कराई जाएगी?”
कलमी गाँव अब नए भवन का इंतजार नहीं, सुरक्षा की गारंटी मांग रहा है।