वर्ष 2023 के 3 नये कानून का प्रशिक्षण और समीक्षा बैठक सम्पन्न कलेक्टर एसपी सहित कई अधिकारी हुए शामिल

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सारंगढ़ बिलाईगढ़/ कलेक्टर एवं जिला दंडाधिकारी पद्मिनी भोई साहू की अध्यक्षता में कलेक्टर कार्यालय सभागार में वर्ष 2023 के 3 नये कानून का प्रशिक्षण और समीक्षा बैठक सम्पन्न हुआ। कलेक्टर ने सभी विभागों के अधिकारियों को समन्वय के साथ 3 नये कानून का बेहतर पालन और क्रियान्वयन करने के निर्देश दिए। इस अवसर पर एसपी सुनील शर्मा, न्यायिक अधिकारी सहित जिले के कानून व्यवस्था से जुड़े राजस्व, पुलिस, चिकित्सा, महिला एवं बाल विकास अधिकारी और सभी थाना प्रभारी उपस्थित थे।

प्रशिक्षण में जानकारी दी गई कि, भारतीय न्याय संहिता, 2023 (बीएनएस), भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता, 2023 (बीएनएसएस) और भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 2023 (बीएसए) 1 जुलाई 2024 से पूरे देश में लागू हो गए हैं। आईजीओटी (आई गॉट) कर्मयोगी प्लेटफॉर्म पर 110 ई-लर्निंग कोर्स उपलब्ध कराए गए हैं, जिनमें से 76 कोर्स नए आपराधिक कानूनों से संबंधित हैं।

न्याय संहिता में आपराधिक न्याय प्रक्रिया के अलग-अलग चरणों में तकनीक के इस्तेमाल का प्रावधान है। इनके लागू करने के लिए डिजिटल प्रणाली और आवेदन उपलब्ध कराए गए हैं। इनमें फर्स्ट इंफॉर्मेशन रिपोर्ट का इलेक्ट्रॉनिक रजिस्ट्रेशन (ई-एफआईआर), समन का इलेक्ट्रॉनिक संचार और भेजना (ई-समन), तलाशी, जब्ती और जांच की कार्यवाही की ऑडियो-वीडियो रिकॉर्डिंग, फोरेंसिक सबूत इकट्ठा करने की वीडियोग्राफी और बयानों की इलेक्ट्रॉनिक रिकॉर्डिंग (ई-साक्ष्य), वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग (न्याय श्रुति) के जरिए अदालती कार्यवाही का संचालन, मेडिकल लीगल एग्जामिनेशन रिपोर्ट और पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनाने के लिए एमईडीएलईएपीआर और पुलिस, अदालतों, जेलों, अभियोजन और फोरेंसिक साइंस लैबोरेटरी के बीच एफआईआर, चार्ज-शीट और दूसरे दस्तावेजों के इलेक्ट्रॉनिक आदान-प्रदान को आसान बनाने के लिए इंटर-ऑपरेबल क्रिमिनल जस्टिस सिस्टम (आईसीजेएस) शामिल है। इसका इस्तेमाल पूरे देश में किया जाता है।

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इन नए कानूनों का उद्देश्य जांच प्रक्रिया को सुव्यवस्थित करना, पीड़ितों के अधिकारों को सशक्त बनाना और भारत के बढ़ते डिजिटल प्रभाव के अनुरूप न्याय प्रणाली का आधुनिकीकरण करना था। भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) ने 1860 की भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) का स्थान लिया है। इसने अपराधों को सुव्यवस्थित किया है, परिभाषाओं को आधुनिक बनाया है और नए अपराधों को शामिल किया है। बीएनएसएस अंतर्गत पुलिस गंभीर अपराधों के लिए निर्धारित समय अवधि में जांच पूरी करेगी।एफआईआर, आरोप पत्र और गवाहों को समन इलेक्ट्रॉनिक रूप से दाखिल और तामील किए जा सकते हैं। अधिकार क्षेत्र की परवाह किए बिना कोई भी पुलिस स्टेशन शिकायत दर्ज कर सकता है। 7 वर्ष से अधिक की सजा वाले सभी अपराधों के लिए फोरेंसिक विशेषज्ञों का उपयोग अनिवार्य होगा। जमानत के हक और विचाराधीन कैदियों के अधिकारों पर अधिक स्पष्टता, पीड़ित जांच की प्रगति के बारे में अद्यतन जानकारी की मांग कर सकते हैं। गंभीर अपराधों के लिए जमानत सुनवाई में पीड़ित की भागीदारी। कुछ अपराधों में अनिवार्य मुआवजा और पुनर्वास। भारतीय साक्ष्य अधिनियम (बीएसए) 2023 भारतीय साक्ष्य अधिनियम, 1872 का स्थान लेता है और स्वीकार्यता, डिजिटल प्रलेखन और प्रौद्योगिकी की भूमिका पर ध्यान केंद्रित करता है।

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बीएनए अंतर्गत इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य की मान्यता ( कानून विशेष रूप से ईमेल, सीसीटीवी रिकॉर्डिंग, ब्लॉकचेन पर रिकॉर्ड और मोबाइल उपकरणों से प्राप्त डेटा के रूप में इलेक्ट्रॉनिक/डिजिटल साक्ष्य को मान्यता) देता है। प्रमाणित इलेक्ट्रॉनिक अभिलेखों को तब तक प्रामाणिक माना जाता है जब तक कि अन्यथा सिद्ध न हो जाए। कानून गवाहों की सुरक्षा व्यवस्था प्रदान करता है और पूछताछ की प्रक्रिया को सरल बनाता है। इलेक्ट्रॉनिक अनुबंधों, ई-हस्ताक्षरों और ऑनलाइन अभिलेखों की मान्यता देता है। भारतीय साक्षी अधिनियम के इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य प्रावधान साइबर अपराध मामलों, वित्तीय धोखाधड़ी और डिजिटल संचार विवादों में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे, जिससे मुकदमे तकनीकी वास्तविकताओं के अनुरूप अधिक संरेखित होंगे।


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