गुडेली में अवैध खनन: का जकिरा कार्यवाही शून्य सरकारी राजस्व की हो रही भारी क्षति ,खनिज  विभाग की दिख रही लापरवाही

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सारंगढ़ बिलाईगढ़ जिले के गुडेली क्षेत्र में पत्थर खदानों में अवैध खनन की समस्या अब गंभीर रूप ले चुकी है। यहां बिना रॉयल्टी के पत्थरों की आपूर्ति और उनके परिवहन की गतिविधियां बढ़ गई हैं, जिससे सरकारी खजाने को हर वर्ष लाखों करोड़ों की क्षति हो रही है।

खनिज विभाग की लापरवाही और माफियाओं के गठजोड़ के कारण यह अवैध व्यापार अब तक बिना किसी रोक-टोक के चलता आ रहा है। इस स्थिति से न केवल सरकारी राजस्व पर असर पड़ रहा है, बल्कि यह क्षेत्र के विकास के लिए भी बड़ा खतरा बन चुका है।

अवैध खनन: सरकारी राजस्व की हानि

गुडेली में अवैध खनन का कारोबार तेजी से बढ़ रहा है, और इससे सरकारी राजस्व को भारी नुकसान हो रहा है। पत्थरों को बिना रॉयल्टी के निकाला जा रहा है और उसे विभिन्न क्रेशरों तक पहुंचाया जा रहा है। खनिज विभाग की अनदेखी के कारण यह गतिविधियां लगातार जारी हैं, जबकि इससे सरकार को राजस्व की आय नहीं हो रही। यह स्थिति जिले की अर्थव्यवस्था के लिए घातक हो सकती है, क्योंकि यदि यही सिलसिला चलता रहा, तो स्थानीय प्रशासन और विकास कार्यों के लिए आवश्यक वित्तीय संसाधन प्रभावित होंगे।

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बिना रॉयल्टी के पत्थरों की आपूर्ति

गुडेली में अवैध खनन से निकाले गए पत्थरों की सप्लाई बिना रॉयल्टी के हो रही है। यह न केवल नियमों का उल्लंघन है, बल्कि यह सरकारी खजाने की कमी का कारण भी बन रहा है। खनिज विभाग के अधिकारियों की चुप्पी ने माफियाओं को पूरी छूट दी है, और यह प्रक्रिया बिना किसी रोक-टोक के जारी है। यदि यह अवैध व्यापार इस तरह चलता रहा, तो इससे सरकारी राजस्व की हानि और क्षेत्रीय विकास की प्रक्रिया में रुकावट आ सकती है।

अवैध परिवहन: पर प्रशासन की चुप्पी

अवैध खनन से निकाले गए पत्थरों का परिवहन भी बिना किसी कड़ी निगरानी के हो रहा है। यह गतिविधियां खुलेआम चल रही हैं, और प्रशासन की चुप्पी से माफियाओं को और बढ़ावा मिल रहा है। यह परिवहन सरकारी नियमों का उल्लंघन करता है, और खनिज विभाग की नकेल कसने के बजाय माफिया का मनोबल बढ़ा रहा है। इस मुद्दे पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है, ताकि अवैध परिवहन को रोका जा सके और सरकारी राजस्व की क्षति को सीमित किया जा सके।

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खनिज विभाग की लापरवाही और मिलीभगत का लग रहा आरोप

गुडेली में अवैध खनन के बढ़ते कारोबार से खनिज विभाग पर गंभीर आरोप लग रहे हैं। क्या यह केवल लापरवाही है या विभागीय अधिकारियों की माफियाओं के साथ मिलीभगत का परिणाम? यह सवाल आजकल चर्चा का विषय बना हुआ है। जब खनिज विभाग को अवैध खनन के बारे में जानकारी है, तो फिर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है? विभागीय अधिकारी इस गंभीर मुद्दे पर चुप्प क्यों हैं? इन सवालों के जवाब खोजना जरूरी है, क्योंकि यह केवल सरकारी राजस्व की हानि का मामला नहीं, बल्कि प्रशासन की कार्यशैली पर भी प्रश्नचिह्न है।

कलेक्टर का ध्यान आकर्षित करना

कलेक्टर को इस गंभीर मुद्दे का संज्ञान लेना चाहिए। गुडेली क्षेत्र में अवैध खनन और बिना रॉयल्टी के पत्थरों की सप्लाई से सरकारी राजस्व को हो रही क्षति को देखते हुए, कलेक्टर को तुरंत कार्रवाई करनी चाहिए। यदि इस मुद्दे पर जल्द ही कदम नहीं उठाए गए, तो यह अवैध व्यापार और भी बढ़ सकता है और क्षेत्र के विकास को और प्रभावित कर सकता है।

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बहरहाल गुडेली में अवैध खनन और बिना रॉयल्टी के पत्थरों की आपूर्ति से सरकारी राजस्व को हो रही हानि को रोकने के लिए कड़ी कार्रवाई जरूरी है। खनिज विभाग और स्थानीय प्रशासन को इस अवैध व्यापार के खिलाफ ठोस कदम उठाने चाहिए। कलेक्टर को इस मामले में सक्रिय भूमिका निभानी चाहिए, ताकि क्षेत्रीय विकास प्रभावित न हो और सरकारी खजाने की क्षति रोकी जा सके।

इस पूरे मामले में जब हमने खनिज अधिकारी हीरादास भारद्वाज से दूरभाष के माध्यम से संपर्क कर जानकारी लेने का प्रयास किया तो उन्होंने फोन कॉल रिसीव नहीं किया।


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