विद्या, विचार और सामाजिक प्रतिबद्धता का सम्मान अंतराष्ट्रीय मंच पर गौरवान्वित हुए डॉ. गुलाब चंद भारद्वाज
सारंगढ । किसी छोटे नगर के शैक्षणिक परिसर से उठी विचारों की लौ जब अंतराष्ट्रीय मंच तक अपनी आभा बिखेरती है, तो वह केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं रहती बल्कि वह पूरे क्षेत्र की बौद्धिक अस्मिता का विस्तार बन जाती है। शासकीय लक्ष्मणेश्वर स्नातकोत्तर महाविद्यालय, खरौद (जिला जांजगीर-चांपा) के समाजशास्त्र विभागाध्यक्ष एवं प्रभारी प्राचार्य डॉ. गुलाब चंद भारद्वाज को “कुसुम अंतराष्ट्रीय आइडियल अचीवर्स अवार्ड” से अलंकृत किया जाना इसी गौरवपूर्ण क्षण की अभिव्यक्ति है।
यह सम्मान गोपाल किरण समाज सेवी संस्था (जीके एस एस) तथा जी.एल.ए. विश्वविद्यालय मथुरा के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित एक दिवसीय अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी के दौरान प्रदान किया गया। “नई शिक्षा नीति वर्तमान चुनौतियाँ एवं संभावनाएँ” विषय पर केंद्रित इस सेमिनार में शिक्षा-जगत के प्रखर मनीषियों ने नीति, प्रयोग और परिणामों के विविध आयामों पर गंभीर मंथन किया। ऐसे बौद्धिक परिवेश में डॉ. भारद्वाज का सम्मानित होना उनके कार्य की प्रासंगिकता को रेखांकित करता है।
डॉ. भारद्वाज को यह अलंकरण उनके विशिष्ट साहित्यिक अवदान, समाजशास्त्रीय दृष्टि की गहराई, शैक्षणिक नेतृत्व और समाजहित में सतत सक्रियता के लिए प्रदान किया गया। उनके व्यक्तित्व में शोध की गंभीरता, लेखनी की संवेदनशीलता और प्रशासनिक दक्षता का संतुलित समागम दिखाई देता है।वे उन शिक्षाविदों में हैं जो शिक्षा को केवल परीक्षा-परिणामों तक सीमित नहीं मानते, बल्कि उसे सामाजिक चेतना और मूल्य-संवर्धन की प्रक्रिया के रूप में देखते हैं।
समाजशास्त्र के अध्येता के रूप में उन्होंने शिक्षा को समाज परिवर्तन के औज़ार के रूप में देखा और उसी दृष्टि से विद्यार्थियों में वैचारिक परिपक्वता तथा सामाजिक उत्तरदायित्व का संस्कार विकसित करने का सतत प्रयास किया। प्रभारी प्राचार्य के रूप में उनका कार्यकाल संस्थान में शैक्षणिक गुणवत्ता और अनुशासन की नई ऊर्जा के रूप में परिलक्षित हुआ है।
पूर्व में भी शिक्षा और सामाजिक क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यो के लिए विभिन्न सम्मानों से विभूषित हो चुके डॉ. भारद्वाज के लिए यह अंतराष्ट्रीय सम्मान उनके दीर्घकालिक कर्मपथ की महत्वपूर्ण उपलब्धि मानी जा रही है।
उनकी इस सफलता पर महाविद्यालय परिवार में उत्साह का वातावरण है। डॉ. शांति कुमार कैवर्त्य, डॉ. बी.पी. देवांगन, प्रो. आर.एन. खुटे, प्रो. आर.एन. यादव, प्रो. चन्द्रशेखर तिवारी सहित प्राध्यापकगण एवं कर्मचारियों ने इसे संस्थान और क्षेत्र की प्रतिष्ठा से जुड़ा क्षण बताते हुए बधाई और शुभकामनाएं प्रेषित की है ।
यह सम्मान केवल एक व्यक्तित्व का अलंकरण नहीं, बल्कि उस शैक्षणिक परंपरा की प्रतिष्ठा है जो विचार, मूल्य और समाज के बीच जीवंत संवाद स्थापित करने में विश्वास रखती है।