भीखमपुरा की सपेरा बस्ती की महिलाएं जुड़ेंगी बुनकरी से, तैयार गमछे और साड़ी हुनर से आत्मनिर्भरता की राह, विकास की मुख्यधारा से जुड़ेंगी महिलाएं जिला प्रशासन की अभिनव पहल से जीवन में आएगा सुखद बदलाव
सारंगढ़–बिलाईगढ़,। जिले के भीखमपुरा की सपेरा बस्ती की जिन महिलाओं की जिंदगी अब तक रोजी-मजदूरी और सीमित आजीविका के साधनों के बीच गुजर रही थी, उन्हें अब हुनर के माध्यम से आत्मनिर्भर बनाने के साथ विकास की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। जिला प्रशासन की अभिनव पहल से इन महिलाओं के हाथ अब करघे पर अपने बेहतर भविष्य का ताना-बाना बुन रहे हैं। प्रशिक्षण में आने को लेकर कभी झिझकने वाली महिलाएं आज आत्मविश्वास और उत्साह के साथ बुनकरी सीख रही हैं। प्रशिक्षण के दौरान साड़ी और गमछे तैयार कर उन्होंने अपने हुनर की पहली झलक भी दिखाई है।
राज्य शासन की महिलाओं को आर्थिक रूप से सशक्त और स्वावलंबी बनाने की मंशा के अनुरूप कलेक्टर श्रीमती पद्मिनी भोई साहू के निर्देशन में राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान के अंतर्गत जिले में नवाचार के रूप में कौशली साड़ी बुनकर प्रशिक्षण संचालित किया जा रहा है। सेवा संकल्प अभियान के ‘सेवा मेरा योगदान’ कार्यक्रम के तहत ग्राम पंचायत कंडोला में 31 अगस्त 2026 से प्रारंभ यह प्रशिक्षण समृद्धि वीवर्स पंचधार के सहयोग से दिया जा रहा है।
शुरुआत में प्रशिक्षण के लिए 35 महिलाओं का समूह बनाया गया था। बाद में कुछ अन्य महिलाओं ने भी साड़ी और गमछा बुनने का हुनर सीखने की इच्छा जताई, जिस पर पांच और महिलाओं को प्रशिक्षण से जोड़ा गया। इस प्रकार अब कुल 40 महिलाएं प्रशिक्षण प्राप्त कर रही हैं। इनमें भीखमपुरा सपेरा बस्ती की 12, पंचधार की 6, बोदा की 5, बिलाईगढ़ क्षेत्र की 2, नावापारा की एक, कटंगपाली की एक, कंडोला की 11 तथा बिलाईगढ़ क्षेत्र की 2 अन्य महिलाएं शामिल हैं।
इस पहल की सबसे महत्वपूर्ण तस्वीर भीखमपुरा की सपेरा बस्ती में दिखाई दे रही है। यहां की महिलाएं शुरुआत में प्रशिक्षण से जुड़ने को लेकर झिझक रही थीं, लेकिन अब करघे पर उनके हाथ आत्मविश्वास के साथ चल रहे हैं। प्रशिक्षण प्राप्त करने वालों में तीन विधवा महिलाएं भी हैं, जो रोजी-मजदूरी कर अपना जीवनयापन कर रही थीं। अब उन्हें भरोसा है कि बुनकरी का हुनर उनकी आय बढ़ाने का नया जरिया बनेगा। प्रशिक्षण के दौरान अब तक एक साड़ी और चार गमछे तैयार किए जा चुके हैं।
कलेक्टर श्रीमती पद्मिनी भोई साहू ने कहा कि शासन की मंशा के अनुरूप महिलाओं को कौशल और आजीविका से जोड़कर आर्थिक रूप से सशक्त बनाने की दिशा में लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। विशेष रूप से ऐसे परिवारों और समुदायों तक योजनाओं एवं आजीविका के अवसरों की पहुंच सुनिश्चित करना जरूरी है, जो अब तक इन अवसरों से अपेक्षाकृत दूर रहे हैं। उन्होंने कहा कि महिलाओं को हुनर देकर आत्मनिर्भर बनाना और उन्हें विकास की मुख्यधारा से जोड़ना ‘सेवा मेरा योगदान’ की भावना को सार्थक करता है। प्रशिक्षण से प्राप्त कौशल महिलाओं के आत्मविश्वास को बढ़ाने के साथ उनके परिवार की आर्थिक स्थिति में भी सकारात्मक बदलाव लाएगा।
जिला पंचायत के मुख्य कार्यपालन अधिकारी श्री ऋषिकेश तिवारी ने कहा कि बिहान के माध्यम से महिलाओं की रुचि और स्थानीय संभावनाओं के अनुरूप आजीविका के नए अवसर तैयार किए जा रहे हैं। प्रशिक्षण का उद्देश्य केवल बुनकरी सिखाना नहीं, बल्कि महिलाओं को ऐसा कौशल देना है, जिसे वे आगे नियमित आय के साधन के रूप में विकसित कर सकें। उन्होंने कहा कि प्रशिक्षण के बाद महिलाओं को उत्पादन और बाजार से जोड़ने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे, ताकि उनके हाथों का हुनर आर्थिक स्वावलंबन का आधार बन सके।
ज्योति पटेल ने महिलाओं का उत्साह बढ़ाते हुए कहा कि ग्रामीण महिलाओं में प्रतिभा और मेहनत की कमी नहीं है, आवश्यकता उन्हें अवसर, मार्गदर्शन और विश्वास देने की है। जो महिलाएं शुरुआत में करघे पर काम सीखने को लेकर झिझक रही थीं, आज उन्हीं के हाथों से साड़ी और गमछे तैयार हो रहे हैं। यह बदलाव उनके भीतर बढ़ते आत्मविश्वास और आगे बढ़ने की इच्छाशक्ति को दर्शाता है। इस अवसर पर जगन्नाथ पाणिग्रही, अजय जवाहर नायक, अभिलाषा नायक, सहोदरा सिदार, डॉ. दिनेश लाल जांगड़े, विद्या चौहान एवं ज्योति पटेल सहित अतिथियों ने प्रशिक्षण प्राप्त कर रही महिलाओं द्वारा तैयार साड़ी एवं गमछों का अवलोकन किया और उनके हुनर एवं उत्साह की सराहना करते हुए उन्हें आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ने के लिए प्रोत्साहित किया।
