सांसद, पुजारी, संत हुए एक, उठी नाम बदलने की मांग, बाबा महाकाल की नगरी उज्जैन से जुड़ा है मामला

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उज्जैन. मध्य प्रदेश के उज्जैन में कुछ दिन पहले 3 गांवों के नाम बदले गए थे. अब महाकाल मंदिर क्षेत्र से सटे इलाकों के नाम बदलने की मांग जोर पकड़ रही है. सांसद, पुजारी, संतों और स्थानीय संगठनों का मानना है कि यह बदलाव महाकाल की नगरी की पवित्रता के लिए जरूरी है. उज्जैन, जिसे महाकाल की नगरी कहा जाता है, इन दिनों नाम बदलने के मुद्दे पर चर्चा का केंद्र बन गया है. बीते शनिवार को मुख्यमंत्री मोहन यादव ने बड़नगर में 3 गांवों के नाम बदले थे.

अब मौलाना को विक्रम नगर, जाहांगीरपुर को जगदीशपुर और गजनीखेड़ी को चामुंडा माता नगरी हो गया है. मुख्यमंत्री ने साफ कहा कि अगर मुंबई और चेन्नई का नाम बदला जा सकता है, तो गांवों का क्यों नहीं.

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क्यों उठ रही है मांग

उज्जैन में गांवों के बाद अब महाकाल मंदिर क्षेत्र में बदलाव की मांग उठ रही है. बेगम बाग, अंडा गली, और तोपखाना जैसे नाम बदलने की मांग स्थानीय पुजारियों, महंतों और सांसदों ने की है. इनका तर्क है कि यह क्षेत्र श्रद्धालुओं के लिए पवित्र है और ऐसे नामों का कोई औचित्य नहीं है. उज्जैन सांसद अनिल फिरोजिया ने कहा कि महाकाल मंदिर तक जाने वाले मार्ग का नाम सुनकर लोग भ्रमित हो जाते हैं. हमने मांग की है कि इसे ‘महाकाल लोक मार्ग’ का नाम दिया जाए. यह धार्मिक पर्यटन को भी बढ़ावा देगा.

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महाकाल मंदिर के पुजारी चम्मू गुरु ने कहा कि उज्जैन महाकाल मंदिर के पुजारियों ने भी इस मुद्दे पर अपनी सहमति जताई है. उनका सुझाव है कि आसपास के इलाकों का नाम ‘महाकाल वन’ या ‘महाकाल क्षेत्र’ किया जाए. तो वहीं महाकाल मंदिर के पुजारी महेश शर्मा ने कहा कि यह भगवान महाकाल की नगरी है. बेगम बाग जैसे नाम अब प्रासंगिक नहीं हैं. यहां की पहचान महाकाल से होनी चाहिए.

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महामंडलेश्वर शेलशानंद ने संस्कृति और परंपरा से जोड़ते हुए बेगम बाग और अंडा गली जैसे नामों को वैदिक या वैज्ञानिक आधार पर बदलने की जरूरत बताई. उनका कहना है कि नाम केवल पहचान नहीं, ऊर्जा भी देते हैं. हमारे धार्मिक केंद्रों के नाम वैदिक महत्व के होने चाहिए.

ऐसे हो सकता है नाम

मौलाना → विक्रम नगर

 

जांहगीरपुर → जगदीशपुर

गजनीखेड़ी → चामुंडा माता नगरी

बेगम बाग, तोप खाना,अण्डा गली, → महाकाल वन होन चाहिए

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